बिहार में हवाई कनेक्टिविटी को पंख, छह क्षेत्रीय हवाई अड्डों के लिए हुआ एएआई के साथ समझौता

राज्य सरकार और एएआई की साझेदारी से दूरदराज़ जिलों को मिलेगा हवाई संपर्क, ₹150 करोड़ की प्रारंभिक स्वीकृति

30 जून 2025, नई दिल्ली

बिहार की क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी को मजबूती देने के उद्देश्य से आज बिहार सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता नई दिल्ली स्थित बिहार निवास में हुआ, जहां बिहार के मुख्य सचिव श्री अमृत लाल मीणा (IAS) और रेजीडेंट कमिश्नर श्री कुंदन कुमार (IAS) प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

इस अवसर पर बिहार सरकार के निदेशक, नागरिक उड्डयन विभाग, श्री निलेश देवरे (IAS) ने एएआई अधिकारियों के साथ MoU दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया।

बिहार में हवाई कनेक्टिविटी को पंख, छह क्षेत्रीय हवाई अड्डों के लिए हुआ एएआई के साथ समझौता

यह परियोजना हाल ही में मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी प्राप्त कर चुकी है। इसके तहत राज्य के छह ज़िलों—मधुबनी, बिरपुर (सुपौल), मुंगेर, वाल्मीकि नगर (पश्चिम चंपारण), मुजफ्फरपुर और सहरसा—में छोटे क्षेत्रीय हवाई अड्डों का निर्माण किया जाएगा। पहले चरण में ₹150 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक हवाई अड्डे के लिए ₹25 करोड़ का बजट निर्धारित है।

मुख्य सचिव श्री अमृत लाल मीणा ने इस अवसर पर कहा, “यह समझौता राज्य में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को सशक्त करने की दिशा में एक निर्णायक पहल है। यह न केवल बिहार की परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाएगा, बल्कि विकास और निवेश के लिए नए अवसर भी खोलेगा।”

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रेजीडेंट कमिश्नर श्री कुंदन कुमार ने कहा, “नई दिल्ली स्थित बिहार निवास अब नीतिगत संवाद और समन्वय का प्रमुख केंद्र बन गया है। यह समझौता केंद्र व राज्य के बीच बेहतर सहकार्य को दिशा देगा और बिहार की हवाई सेवाओं को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा।”

यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना और भारत सरकार की उड़ान (Ude Desh ka Aam Nagrik) योजना के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य सस्ती हवाई यात्रा के माध्यम से देश के पिछड़े और उपेक्षित क्षेत्रों को जोड़ना है। प्रस्तावित हवाई अड्डों पर 19-सीटर विमान संचालित किए जाएंगे, जिससे इन दूरवर्ती क्षेत्रों की देश के अन्य भागों से सीधी हवाई कनेक्टिविटी संभव हो सकेगी।

इस परियोजना के क्रियान्वयन से बिहार के पिछड़े जिलों में पर्यटन, व्यापार और स्थानीय रोजगार के अवसरों में वृद्धि होने की संभावना है। सरकार ने संकेत दिया है कि भविष्य में और भी क्षेत्रों को हवाई संपर्क से जोड़ने के लिए बजटीय प्रावधान सुनिश्चित किए जाएंगे।

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