IMC गया को मिली पर्यावरणीय मंज़ूरी, बिहार का पहला औद्योगिक टाउनशिप अब विकास की राह पर

 

पटना: बिहार के औद्योगिक विकास को गति देने के लिए एक बड़ी सफलता मिली है। गया जिले में प्रस्तावित राज्य का पहला एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप IMC गया को पर्यावरण मंत्रालय (MoEF&CC) से पर्यावरणीय मंज़ूरी मिल गई है। यह मंज़ूरी 1,670 एकड़ भूमि के लिए दी गई है और परियोजना को अमृतसर–कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर (AKIC) के तहत विकसित किया जा रहा है। इसका परियोजना का उद्देश्य गया को उद्योग, निवेश और रोजगार का नया केंद्र बनाना है।

IMC गया में उद्योग, वाणिज्य, आवास, सार्वजनिक सेवाएं और हरित क्षेत्र जैसे विभिन्न उपयोगों के लिए ज़ोन तय किए गए हैं। यह टाउनशिप राष्ट्रीय राजमार्गों, रेलवे और जलमार्गों से जुड़ी होगी, जिससे परिवहन और लॉजिस्टिक्स की सुविधा मिलेगी।

पर्यावरणीय मंज़ूरी केवल सात महीनों में मिली है, जिससे यहां आने वाले उद्योगों को अलग से जनसुनवाई कराने की जरूरत नहीं होगी। इससे समय बचेगा और काम तेज़ी से शुरू हो सकेगा। अब EPC टेंडर की प्रक्रिया शुरू होगी और आधारभूत ढांचा—जैसे सड़कें, जल निकासी, जल आपूर्ति और प्रशासनिक भवन—बनाने का रास्ता साफ हुआ है।

यह परियोजना बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया लिमिटेड (BIMCGL) द्वारा विकसित की जा रही है, जो केंद्र और राज्य सरकार का संयुक्त उपक्रम है। यहां जल शोधन संयंत्र (WTP), सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स पार्क, आंतरिक सड़कें, और एकीकृत कमांड सेंटर जैसी सुविधाएं तैयार की जाएंगी।

इस औद्योगिक टाउनशिप में कुल क्षेत्रफल का 33% हिस्सा हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। उद्योगों के लिए अलग-अलग ज़ोन बनाए जाएंगे और प्लग-एंड-प्ले इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध होगा ताकि कंपनियां बिना देरी के काम शुरू कर सकें।

परियोजना से ₹16,000 करोड़ का निवेश आने की उम्मीद है और 1.10 लाख से अधिक रोजगार सृजित होंगे। IMC गया एक काउंटर मैगनेट शहर के रूप में काम करेगा, जिससे स्थानीय लोगों को नौकरी के अवसर मिलेंगे और अन्य राज्यों में पलायन रुकेगा।

जल आपूर्ति की दीर्घकालिक योजना की समीक्षा के लिए हाल ही में एक संयुक्त निरीक्षण हुआ, जिसमें NICDC, BIADA, जल संसाधन विभाग, वन विभाग और गया जिला प्रशासन के अधिकारी शामिल हुए। इससे पहले सड़क कनेक्टिविटी का सर्वे भी हो चुका है।

IMC गया को केंद्र और राज्य सरकार दोनों का मजबूत समर्थन मिला है और यह बिहार के औद्योगिक भविष्य को नया आकार देने की दिशा में एक अहम कदम है।

 

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