नई दिल्ली, 11 जनवरी 2026 – भारत सरकार ने रॉयटर्स की उस रिपोर्ट को पूरी तरह फर्जी करार दिया है, जिसमें दावा किया गया था कि स्मार्टफोन निर्माताओं को सुरक्षा उपायों के तहत अपनी प्रोप्राइटरी सोर्स कोड सरकार के साथ साझा करने के लिए मजबूर किया जाएगा। इस खबर से एप्पल, सैमसंग जैसी बड़ी कंपनियों में हलचल मच गई थी।
प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) के फैक्ट चेक यूनिट ने स्पष्ट किया कि सरकार ने ऐसा कोई भी प्रस्ताव नहीं दिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) केवल मोबाइल सुरक्षा के लिए सबसे बेहतर नियामक ढांचा तैयार करने हेतु हितधारकों से सामान्य परामर्श कर रहा है। यह उद्योग के साथ सुरक्षा मानकों पर की जाने वाली नियमित चर्चाओं का हिस्सा है।
अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि अभी कोई अंतिम नियम नहीं बनाए गए हैं और भविष्य में कोई भी फ्रेमवर्क सभी पक्षों से विस्तृत विचार-विमर्श के बाद ही तैयार होगा। यह कदम भारत के विशाल स्मार्टफोन बाजार में यूजर डेटा सुरक्षा और बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड को रोकने की दिशा में उठाया जा रहा है, लेकिन बिना किसी जबरदस्ती के।
सरकार ने जनता से अपील की है कि ऐसी महत्वपूर्ण नीतिगत खबरों पर विश्वास करने या शेयर करने से पहले हमेशा आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि करें। यह स्पष्टीकरण सरकार की पारदर्शी और सहयोगात्मक नीति को दर्शाता है, जहां सुरक्षा और उद्योग की चिंताओं में संतुलन बनाया जा रहा है।





