सोमनाथ स्वाभिमान पर्व विध्वंस नहीं 1000 साल की यात्रा का पर्वः प्रधानमंत्री मोदी

सोमनाथ, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि सोमनाथ पर आक्रमण आर्थिक लूट के लिए नहीं बल्कि तुष्टिकरण के लिए किया गया। दुर्भाग्य से आज भी हमारे देश में वे ताकतें मौजूद हैं, जिन्होंने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का विरोध किया था।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर रविवार को सद्भावना ग्राउंड में रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि `यह पर्व विध्वंस नहीं बल्कि 1000 साल की यात्रा का पर्व है। सोमनाथ को नष्ट करने के अनेकों प्रयास हुए। उसी तरह विदेश आक्रांताओं द्वारा कई सदियों तक भारत को खत्म करने की कोशिशें होती रहीं लेकिन न तो सोमनाथ नष्ट हुआ और न ही भारत नष्ट हुआ। क्योंकि भारत और भारत की आस्था के केंद्र एक-दूसरे में समाए हुए हैं।’

प्रधानमंत्री ने कहा कि `आज तलवारों के जगह दूसरे तरीकों से भारत के खिलाफ षड्यंत्र हो रहे हैं इसलिए हमें ज्यादा सावधान रहना है। हमें खुद को शक्तिशाली बनाना है। ऐसी हर ताकत को हराना है जो हमें बांटने की साजिश रच रही हो। जब हम अपनी विरासत और आस्था से जुड़े रहते हैं तो हमारी सभ्यता की जड़ें मजबूत होती है। मैंने भारत के लिए एक हजार साल का विजन रखा था। आज देश की संस्कृति का पुनर्जागरण करोड़ों देशवासियों के मन में विश्वास भर रहा है। विकसित भारत के लिए लोगों को भी भरोसा है। भारत अपने गौरव को नई बुलंदी देगा। हम विकास की नई ऊंचाई को छुएंगे। देश अब तैयार हो चुका है। सोमनाथ मंदिर की ऊर्जा हमारे संकल्पों को आशीर्वाद दे रही है। विरासत की प्रेरणा दे रही है।’

उन्होंने कहा कि `जब महमूद गजनी से लेकर औरंगजेब हमले कर रहे थे तब वे भूल गए थे कि सोमनाथ के नाम में सोम यानी अमृत है। ऐसे में जब-जब इसे नष्ट करने की कोशिश हुई, सोमनाथ मंदिर उठ खड़ हुआ। मजहबी कट्टरपंथी इतिहास के पन्नों में सिमट गए तो वहीं सोमनाथ मंदिर आज भी स्वाभिमान से खड़ा है।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि `गजनी को लगा था कि उसने सोमनाथ मंदिर के वजूद को मिटा दिया लेकिन 12 शाताब्दी में पुनर्निर्माण हुआ। फिर अलाउद्दीन खिलजी ने आक्रमण किया। 14वीं शब्तादी में जूनागढ़ के राजा ने पुनर्निर्माण किया। 14वीं शताब्दी में आक्रामण किया। फिर सुल्तान अहमद शाह ने दुस्साहस किया। फिर सुल्तान महमूद वेगड़ा ने मंदिर को मस्जिद बनाने की कोशिश की। 17वीं और 18वीं शताब्दी में औरंगजेब का दौर आया। उसने मंदिर को अपवित्र करने की कोशिश तो अहित्याबाई होलकर ने मंदिर बनवा दिया। सोमनाथ का इतिहास, विजय और पुनर्निर्माण का है।’

उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से आज़ादी के बाद गुलामी की मानसिकता वाले लोगों ने इनसे पल्ला झाड़ने का कोशिश की। उस इतिहास को भुलाने के कुत्सित प्रयास किए गए।जब भारत गुलामी की बेड़ियों से मुक्त हुआ, जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण की शपथ ली तो उन्हें भी रोकने की कोशिश की गई। साल 1951 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के यहाँ आने पर भी आपत्ति जताई गई।

इससे पहले उन्होंने अपने संबोधन की शुरूआत करते हुए कहा कि `पवित्र श्री सोमनाथ मंदिर में इस महापर्व का सहभागी बनना मेरे जीवन का अविस्मरणीय और अमूल्य क्षण है। आज सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक हजार साल पहले, इसी जगह पर क्या माहौल रहा होगा। आप जो यहां उपस्थित हैं, उनके पुरखों ने, हमारे पुरखों ने जान की बाज़ी लगा दी थी। अपनी आस्था के लिए, अपने विश्वास के लिए, अपने महादेव के लिए उन्होंने अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया। हजार साल पहले वे आक्रमणकारी सोच रहे थे कि उन्होंने हमें जीत लिया लेकिन आज एक हजार साल बाद भी सोमनाथ महादेव के मंदिर पर फहरा रही ध्वजा पूरी सृष्टि का आह्वान कर रही है कि हिंदुस्तान की शक्ति क्या है, उसका सामर्थ्य क्या है। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व करोड़ों-करोड़ भारतीयों की शाश्वत आस्था, साधना और अटूट संकल्प का जीवंत प्रतिबिंब है।’

उन्होंने कहा कि `भारत ने दुनिया को ये नहीं सिखाया कि कैसे दूसरों को हरा कर जीता जाए। बल्कि ये सिखाया कि कैसे दिलों को जीता जाए। ये विचार दुनिया की जरूरत है।’ उन्होंने आह्वान किया कि 1000 साल की यात्रा के साथ मंदिर के 75 साल पूरे होने की गौरवशाली यात्रा पर मनाए जा रहे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को 2027 मई तक मानते रहना है।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर में करीब 40 मिनट तक पूजा-अर्चना की। शिवलिंग पर जल चढ़ाया, फिर फूल अर्पित किए और पंचामृत से अभिषेक किया। मंदिर से बाहर आकर प्रधानमंत्री ने पुजारियों और स्थानीय कलाकारों से मुलाकात की। मोदी ने ढोल (चेंदा वाद्ययंत्र) बजाया और शोभायात्रा में भी शामिल हुए। उल्लेखनीय है कि सोमनाथ मंदिर पर साल 1026 में हुए पहले आक्रमण के हजार साल पूरे होने पर ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ मनाया जा रहा है।

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