भारतीय रेलवे की सिलो लोडिंग पहल के कारण थर्मल पावर प्लांट्स में कोयला स्टॉक 61.3 मिलियन टन के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचा, जो 25 दिनों की खपत के लिए पर्याप्त है

जी. किशन रेड्डी और अश्विनी वैष्णव की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, सिलो इन्फ्रास्ट्रक्चर और मल्टी-मोडल परिवहन पर हुआ जोर

24 जून 2025, नई दिल्ली

भारत की ऊर्जा आपूर्ति को अधिक कुशल, टिकाऊ और बाधारहित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तहत आज कोयला और खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी तथा रेल, आईटी और सूचना व प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने एक उच्चस्तरीय बैठक में कोयला रसद एवं परिवहन दक्षता की समीक्षा की। बैठक में सिलो लोडिंग प्रणाली के विस्तार और कोयला स्टॉक के प्रबंधन की रणनीतियों पर विशेष फोकस किया गया।

सिलो लोडिंग में लगातार बढ़त

बैठक के दौरान बताया गया कि सिलो से कोयला लोडिंग का अनुपात 2022-23 के 18.8% से बढ़कर 2025-26 (अब तक) में 29% तक पहुंच चुका है। इससे न सिर्फ कोयला सप्लाई की गुणवत्ता बेहतर हुई है, बल्कि वैगनों की क्षति कम हुई है और मौसम की बाधाओं का असर भी घटा है।

मंत्रियों ने कोयले की निकासी को अधिक कुशल और पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित बनाने के लिए सिलो इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से बढ़ाने की दिशा में सहमति जताई।

थर्मल पावर प्लांट्स में रिकॉर्ड स्टॉक

2025 में अब तक देश के सभी थर्मल पावर प्लांट्स में 61.3 मिलियन टन कोयले का स्टॉक दर्ज किया गया है, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है और करीब 25 दिनों की खपत के लिए पर्याप्त है। यह उपलब्धि विशेष रूप से गर्मियों के महीनों में बिजली की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अहम मानी जा रही है।

रेल और समुद्र मार्गों को जोड़ने की योजना

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार रेल-समुद्र-रेल जैसे मल्टी-मोडल परिवहन मॉडल को अपनाकर कोयला आपूर्ति को और अधिक स्थायी एवं कुशल बना रही है। उन्होंने कहा कि रेलवे लॉजिस्टिक्स को अपग्रेड कर कोयला उद्योग की मांगों को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकता है।

ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास का रोडमैप

मंत्री जी. किशन रेड्डी ने इस अवसर पर कहा, “कोयला क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स सुधार और सिलो लोडिंग जैसे उपाय भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक प्रगति के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। हमारा उद्देश्य कोयला आपूर्ति को पारदर्शी, कुशल और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।”

यह भी पढ़ें : नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर 25 जून से लागू होगी नई पार्किंग व्यवस्था

समन्वय से समाधान की दिशा में बढ़ते कदम

यह बैठक कोयला और रेल मंत्रालय के बीच बेहतर तालमेल का प्रमाण रही, जिससे खनन से लेकर बिजलीघर तक की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को अधिक सुचारू और उत्तरदायी बनाया जा सकेगा। साथ ही, मानसून के समय संभावित बाधाओं से निपटने के लिए यह स्टॉक एक मजबूत बैकअप सुनिश्चित करेगा।

इस बैठक ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत सरकार ऊर्जा क्षेत्र में लॉजिस्टिक सुधार और आपूर्ति श्रृंखला को अगले स्तर पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है। रिकॉर्ड कोयला स्टॉक और सिलो लोडिंग में वृद्धि आने वाले वर्षों के लिए स्थिरता और दक्षता का संकेत है।

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