उत्तराखंड के ‘मंडुवा’ और पारंपरिक अनाजों की ब्रांडिंग जरूरी: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान

‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के तहत देहरादून पहुंचे मंत्री ने कहा – पहाड़ी खेती में है अपार संभावनाएं, वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सीधा संवाद जरूरी

6 जून 2025, देहरादून

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को देहरादून में आयोजित ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के कार्यक्रम में उत्तराखंड की पारंपरिक कृषि उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यहां का मोटा अनाज, विशेष रूप से ‘मंडुवा’, अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहा है और इसके प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है।

देहरादून के कौलागढ़ स्थित हिमालयन कल्चरल सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में श्री चौहान ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड के खेत, जलवायु और उत्पाद विशेष हैं। उन्होंने जोर दिया कि वैज्ञानिकों की प्रयोगशालाएं खेतों में होनी चाहिए और इसी सोच से ‘लैब टू लैंड’ मॉडल के तहत देशभर में 2,170 वैज्ञानिकों की टीमें किसानों से संवाद कर रही हैं। उत्तराखंड में भी 75 टीमें सक्रिय हैं।

कृषि मंत्री ने बताया कि इस अभियान के तहत किसानों से सीधे संवाद किया जा रहा है ताकि उनकी व्यावहारिक समस्याओं को समझकर ही आगे की योजनाएं बनाई जा सकें। उन्होंने कहा, “किसान से बड़ा वैज्ञानिक कोई नहीं है। नीति निर्माण किसानों की जमीनी जरूरतों के अनुसार ही होना चाहिए।”

उत्तराखंड में किसानों द्वारा खेतों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए की जा रही घेराबंदी की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि इसे राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने इसे खेती की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम बताया।

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श्री चौहान ने उत्तराखंड की बागवानी और फलों की खेती की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि यहां के सेब अब कश्मीर को प्रतिस्पर्धा दे रहे हैं। ‘काफल’ जैसे पारंपरिक फलों की औषधीय महत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। जैविक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के कृषि उत्पाद वैश्विक बाजार में स्थान बना सकते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और उत्तराखंड सरकार मिलकर राज्य की कृषि के लिए ठोस रोडमैप तैयार करेंगी। “उत्तराखंड को फलों का वैश्विक हब बनाने की दिशा में काम शुरू हो चुका है,” उन्होंने कहा।

कार्यक्रम के अंत में श्री चौहान ने किसानों से मृदा स्वास्थ्य कार्ड का उपयोग करने और मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरकों के संतुलित प्रयोग का आह्वान किया। उन्होंने यह भी घोषणा की कि वे 14 जून को फिर से उत्तराखंड आएंगे और कृषि मेले के तहत किसानों से सीधी मुलाकात करेंगे।

इस अवसर पर उत्तराखंड सरकार के कृषि मंत्री श्री गणेश जोशी, कृषि सचिव डॉ. सुरेंद्र नारायण पांडेय, कृषि महानिदेशक श्री रणवीर सिंह चौहान, पंत कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मनमोहन सिंह चौहान और आईवीआरआई बरेली के निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त सहित कई वैज्ञानिक और अधिकारी मौजूद रहे।

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