छत्तीसगढ़ के ग्रामीण उत्पादक और सामाजिक संस्थाएँ मिलकर ला रहे बदलाव

टीआईएसएस इन्क्यूब फाउंडेशन और दुर्ग जिला इन्क्यूबेशन सेंटर बना उदाहरण, ADKMAKERS ने किया उल्लेखनीय कार्य

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ में ग्रामीण उत्पादकों और कारीगरों की क्षमता तो मौजूद है, लेकिन उन्हें आधुनिक बाजार और ब्रांडिंग की समझ की कमी है। सामाजिक उद्यम इस अंतर को भरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

राज्य में महिला सशक्तिकरण और आजीविका मिशन के तहत कई पहलें हुई हैं, लेकिन अभी भी छोटे उत्पादकों के सामने उत्पादन से लेकर बाज़ार तक की कड़ी को मज़बूत करने की चुनौती बनी हुई है। अधिकांश ग्रामीण उद्यमियों को उत्पाद परिष्करण, ब्रांडिंग, मूल्य निर्धारण और व्यापक बाज़ारों तक पहुंच में कठिनाई होती है।

इसी दिशा में, टीआईएसएस इन्क्यूब फाउंडेशन (TISS Incube Foundation) ने दुर्ग जिला इन्क्यूबेशन सेंटर के सहयोग से एक अनूठा इन्क्यूबेशन मॉडल तैयार किया है, जिसमें देशभर के स्टार्टअप्स और सामाजिक उद्यम स्थानीय उत्पादकों के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। यह मॉडल न केवल प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान कर रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर उत्पाद विकास और विपणन के लिए ठोस रास्ते भी खोल रहा है।

इस पहल में कई सामाजिक संगठनों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिनमें हरियाणा स्थित ADKMAKERS PRIVATE LIMITED एक प्रमुख और उल्लेखनीय संस्था के रूप में उभरी है। “आधुनिक, समृद्ध और कुशल भारत” के विज़न के साथ कार्यरत ADKMAKERS ने छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय SHG और उत्पादक समूहों को कौशल, बाजार जोड़ाव और उत्पाद विकास की दिशा में ठोस सहयोग दिया है।

कंपनी के सीईओ श्री राहुल ढिंगरा ने कहा, “छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अपार संभावनाएं हैं। यहाँ के कारीगर और उद्यमी बेहद मेहनती हैं, परंतु उन्हें आधुनिक बाज़ार की समझ और संपर्क की आवश्यकता है। हमारा उद्देश्य इन्हें प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास देना है ताकि वे अपनी मेहनत का उचित मूल्य पा सकें और लंबे समय तक टिकाऊ आजीविका अर्जित कर सकें।”

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी पहल, सामाजिक उद्यमों के अनुभव और शैक्षणिक संस्थानों के इन्क्यूबेशन मॉडल का यह संयोजन आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकता है। दुर्ग मॉडल जैसी पहलें अगर राज्य के अन्य जिलों में भी लागू की जाएँ, तो ग्रामीण उत्पादक समूह आत्मनिर्भरता से आगे बढ़कर औद्योगिक विकास की मुख्यधारा का हिस्सा बन सकते हैं।

  • Related Posts

    भू-राजनीतिक तनाव के दौर में डॉ. पॉल का संदेश—शांति से ही विकास संभव

    लोकतंत्र, संवाद और मानवीय दृष्टिकोण को संघर्ष समाधान का आधार बताया कोलकाता: कोलकाता प्रेस क्लब में मीडिया को संबोधित करते हुए डॉ. पॉल ने वैश्विक शांति के लिए साझा प्रतिबद्धता…

    Continue reading
    डॉ. भार्गव मल्लप्पा को संगठन की अहम जिम्मेदारी; गजेंद्र सिंह शेखावत के साथ पर्यटन सशक्तिकरण पर विचार-विमर्श

    धार्मिक पर्यटन सर्किट विस्तार और वैश्विक पहचान सुदृढ़ करने पर जोर नई दिल्ली: भारतीय हिंदू परिवार ने अपने विस्तार और सक्रियता को ध्यान में रखते हुए डॉ. भार्गव मल्लप्पा को…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    भू-राजनीतिक तनाव के दौर में डॉ. पॉल का संदेश—शांति से ही विकास संभव

    भू-राजनीतिक तनाव के दौर में डॉ. पॉल का संदेश—शांति से ही विकास संभव

    Spielbank Aachen

    Spinsino

    Aerobet

    Dreamplay Casino Slot Machine Experience

    AllySpin