कार्डिनल रॉबर्ट प्रेवोस्ट बने पोप लियो चौदहवें, पहले अमेरिकी पोप बनाकर रच दिया इतिहास

अमेरिका में जन्मे मिशनरी को चर्च का 267वां पोप चुना गया, वैश्विक कैथोलिक नेतृत्व का नया अध्याय शुरू

8 मई 2025, नई दिल्ली
कैथोलिक चर्च के इतिहास में पहली बार एक अमेरिकी नागरिक को पोप चुना गया है। 69 वर्षीय कार्डिनल रॉबर्ट फ्रांसिस प्रेवोस्ट को पोप चुना गया है और उन्होंने पोप बनने के बाद नाम रखा है पोप लियो चौदहवें (Pope Leo XIV)

स्थानीय समयानुसार शाम 6 बजे के बाद सिस्टीन चैपल की चिमनी से सफेद धुआं निकलते ही यह स्पष्ट हो गया कि 133 कार्डिनलों की सभा ने सर्वसम्मति से नए पोप का चुनाव कर लिया है। संत पेत्रुस स्क्वायर में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं, पुजारियों और आगंतुकों ने खुशी से झंडे लहराए, “विवा इल पापा!” के नारे लगाए और घंटियों की आवाज़ों के साथ जश्न मनाया।

https://x.com/Laurieluvsmolly/status/1920528579764392202

पोप लियो चौदहवें को यह ज़िम्मेदारी पोप फ्रांसिस के निधन के बाद मिली है, जिनका पिछले महीने 88 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। चुनाव प्रक्रिया के दूसरे दिन और चार दौर की मतदान के बाद उन्हें चुना गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि कार्डिनल एकमत थे।

प्रेवोस्ट का जन्म 1955 में अमेरिका के शिकागो शहर में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपने धार्मिक जीवन का बड़ा हिस्सा अमेरिका के बाहर बिताया। सेंट ऑगस्टिन के ऑर्डर में शामिल होने के बाद उन्होंने पेरू में कई वर्षों तक मिशनरी के रूप में सेवा की और फिर चिकलायो के बिशप बने। लैटिन अमेरिका में उनके लंबे अनुभव और बहुभाषी क्षमताओं ने उन्हें चर्च के उत्तर और दक्षिण के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बना दिया।

2023 में, पोप फ्रांसिस ने उन्हें डिकैस्टरी फॉर बिशप्स का प्रीफेक्ट नियुक्त किया था—यह वेटिकन की एक बेहद प्रभावशाली संस्था है, जो दुनियाभर में बिशप्स की नियुक्ति और प्रबंधन की निगरानी करती है। इस पद के ज़रिए वे वेटिकन प्रशासन के केंद्र में आ गए और एक मजबूत और विश्वसनीय नेतृत्वकर्ता के रूप में उनकी पहचान बनी।

संत पेत्रुस बेसिलिका की बालकनी से पहली बार पोप के रूप में प्रकट होते हुए पोप लियो XIV ने विश्व को आशीर्वाद दिया और एक करुणा, सेवा और शांति पर केंद्रित दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने कहा, “आओ, हम विश्वास और भ्रातृत्व में साथ चलें।” यह संदेश उनके पूर्ववर्ती पोप फ्रांसिस की नीतियों की निरंतरता का संकेत देता है।

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धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि पोप लियो XIV, पोप फ्रांसिस द्वारा शुरू किए गए कई सुधारों को आगे बढ़ाएंगे, विशेष रूप से सामाजिक न्याय, पारदर्शिता और हाशिये के समुदायों तक पहुंच पर ज़ोर देते हुए। उनका मिशनरी अनुभव और वैश्विक बिशप नेतृत्व में उनकी भूमिका उन्हें एक ऐसे पोप के रूप में स्थापित करती है जो न केवल जनसमुदाय के करीब हैं, बल्कि संस्थागत उत्तरदायित्वों को भी बखूबी निभाते हैं।

कैथोलिक चर्च की 2000 वर्षों की परंपरा में यह पहली बार है कि किसी अमेरिकी को पोप चुना गया है। पोप लियो XIV का चुनाव यह दर्शाता है कि चर्च अब एक वैश्विक संस्था बन चुकी है, जो विभिन्न संस्कृतियों और महाद्वीपों से नेतृत्व स्वीकार कर रही है।

आने वाले दिनों में पोप लियो XIV के औपचारिक पोप मंत्रालय की शुरुआत होगी, जिसे पूरी दुनिया ध्यानपूर्वक देख रही है—उम्मीद के साथ कि वे चर्च को एक नए और समावेशी युग में मार्गदर्शन देंगे।

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