भारतीय रेलवे के डॉक्टर ने रचा इतिहास: स्टॉकहोम में ISPO वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस में पेश किया नवाचार

उत्तर रेलवे के डॉ. एम.सी. दाश ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर जलवायु-अनुकूल प्रोस्थेटिक तकनीक पर शोध प्रस्तुत कर भारत और रेलवे का बढ़ाया मान

नई दिल्ली, 14 जुलाई 2025

भारतीय रेलवे के लिए यह एक अत्यंत गर्व का क्षण रहा, जब उत्तर रेलवे के सेंट्रल हॉस्पिटल (नई दिल्ली) स्थित आर्टिफिशियल लिंब्स सेंटर के प्रमुख, डॉ. मारांडा चंद्र दाश (डॉ. एम.सी. दाश) ने स्टॉकहोम (स्वीडन) में आयोजित 20वीं इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ प्रोस्थेटिक्स एंड ऑर्थोटिक्स (ISPO) वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस 2025 में भारत और रेलवे के मेडिकल विभाग का प्रतिनिधित्व किया।

यह वैश्विक सम्मेलन 16 से 20 जून 2025 तक आयोजित हुआ, जिसमें दुनिया भर के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। कुल 212 वैज्ञानिक शोध पत्रों में से केवल दो भारत से थे, और उनमें से एक डॉ. दाश का शोध था, जो कि भारतीय रेलवे की ओर से प्रस्तुत किया गया। यह रेलवे और देश दोनों के लिए अत्यंत गर्व की बात है।

18 जून को डॉ. दाश ने अपने शोध – “गर्म और आर्द्र जलवायु के लिए सस्ती और सांस लेने योग्य ट्रांस-टिबियल सॉकेट और लाइनर का विकास” – पर प्रभावशाली प्रस्तुति दी, जिसे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने अत्यंत सराहा। इस शोध के लिए उन्हें €1000 (यूरो) का पुरस्कार भी प्रदान किया गया, जो उनके नवाचार की व्यावहारिक उपयोगिता और वैश्विक महत्व को दर्शाता है।

डॉ. दाश का यह पांचवां अंतरराष्ट्रीय शोध प्रस्तुतीकरण था। वे अब तक 21 शोध पत्र प्रकाशित कर चुके हैं और दो प्रोस्थेटिक्स विषयक पुस्तकों के सह-लेखक भी रह चुके हैं।

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प्रोस्थेटिक्स और ऑर्थोटिक्स के क्षेत्र में दो वर्ष में एक बार आयोजित होने वाला ISPO सम्मेलन, वैश्विक नवाचार, तकनीकी उन्नयन और समावेशी स्वास्थ्य समाधान को प्रोत्साहित करने वाला एक प्रतिष्ठित मंच है।

डॉ. दाश का यह समर्पण उनके निरंतर प्रयासों को दर्शाता है – विशेषकर सस्ती, जलवायु-अनुकूल और मरीज-केंद्रित प्रोस्थेटिक तकनीकों के विकास की दिशा में।

भारतीय रेलवे के लिए यह उपलब्धि न केवल तकनीकी नवाचार में उसकी भूमिका को रेखांकित करती है, बल्कि विश्व पटल पर भारत के मेडिकल कौशल और वैज्ञानिक सोच की पहचान को भी मजबूत करती है।

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