सुप्रीम कोर्ट ने सट्टेबाजी ऐप्स पर प्रतिबंध की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया

डॉ. के.ए. पॉल की जनहित याचिका पर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता और मानवतावादी डॉ. के.ए. पॉल की उस जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है, जिसमें देशभर में ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टेबाजी ऐप्स पर प्रतिबंध या कड़े नियमन की मांग की गई है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन.के. सिंह की पीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई की। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, “सैद्धांतिक रूप से हम आपके साथ हैं—इसे रोका जाना चाहिए… लेकिन शायद आपको गलतफहमी है कि इसे कानून से पूरी तरह रोका जा सकता है। जैसे हत्या को भी कानून के बावजूद नहीं रोका जा सका।”

डॉ. पॉल की दलील—सट्टेबाजी ऐप्स से लाखों युवा कर्ज में, हजारों आत्महत्याएं

डॉ. पॉल ने कोर्ट को बताया कि ये ऐप्स परिवारों को तोड़ रहे हैं और लाखों युवाओं को कर्ज में डुबो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये प्लेटफॉर्म संविधान के अनुच्छेद 21—जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार—का उल्लंघन करते हैं। तेलंगाना सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि सट्टेबाजी के कारण कर्ज में डूबकर 1,000 से अधिक लोगों ने आत्महत्या कर ली है।

30 करोड़ भारतीय निशाने पर, सेलिब्रिटीज के प्रचार से गुमराह हो रहे युवा

डॉ. पॉल ने कहा कि 30 करोड़ भारतीय इन ऐप्स के निशाने पर हैं, जिन्हें सेलिब्रिटी और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि 23 मार्च 2025 को तेलंगाना पुलिस ने 25 बॉलीवुड अभिनेताओं और इन्फ्लुएंसर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 1,100 से अधिक सेलिब्रिटीज और क्रिकेटर अब भी इन ऐप्स का प्रचार कर रहे हैं।

कोर्ट की टिप्पणी—आईपीएल जैसे आयोजनों के दौरान चरम पर होता है सट्टा, केंद्र से मांगा स्पष्टीकरण

जब डॉ. पॉल ने तत्काल निर्देशों की मांग की तो जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “इस बीच, कुछ नहीं किया जा सकता।” हालांकि, कोर्ट ने माना कि क्रिकेट टूर्नामेंट जैसे आईपीएल के दौरान सट्टेबाजी चरम पर होती है और इसे दर्शकों की संख्या के नाम पर छिपाया जाता है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस पर स्पष्ट रुख मांगा और कहा कि राज्यों को नोटिस बाद में दिया जाएगा।

वीपीएन के ज़रिए विदेशी कंपनियां कर रही हैं ऑपरेशन, डॉ. पॉल ने मांगा केंद्रीय कानून

डॉ. पॉल ने कहा कि एक केंद्रीय कानून की अनुपस्थिति में अंतरराष्ट्रीय कंपनियां वीपीएन के माध्यम से भारत में धड़ल्ले से काम कर रही हैं, भले ही कुछ राज्यों में प्रतिबंध लगे हों। उन्होंने इस गतिविधि को रोकने के लिए एक व्यापक केंद्रीय कानून की मांग की।

“ये ऐप्स जुए के जाल हैं, जीवन बर्बाद कर रहे हैं”—डॉ. पॉल का बयान

सुनवाई के बाद डॉ. पॉल ने कहा, “आज एक बड़ा कदम आगे बढ़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने करोड़ों परिवारों, युवाओं और माता-पिता की पीड़ा को सुना है। ये ऐप्स खेल नहीं, जाल हैं। 30 करोड़ लोग गुमराह हो रहे हैं, सेलिब्रिटी पैसे लेकर झूठी उम्मीदें बेच रहे हैं। बेरोजगार युवा जल्द पैसे कमाने की चाह में कर्ज में डूब रहे हैं। गरीब लुट रहे हैं और अमीर मुनाफा कमा रहे हैं। अगर अभी कार्रवाई हो, तो हम लाखों जानें बचा सकते हैं।”

केंद्र से जल्द कानून बनाने और जांच की मांग

डॉ. पॉल ने सट्टेबाजी ऐप्स पर पूर्ण प्रतिबंध, सेलिब्रिटी प्रचार पर रोक और विदेशी कंपनियों द्वारा कथित मनी लॉन्ड्रिंग की ईडी और सीबीआई जांच की मांग की। साथ ही प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से अपील की कि वे तत्काल कानून बनाकर संसद में पारित कराएं।

उन्होंने कहा, “यह हमारे युवाओं, अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र के भविष्य का सवाल है। हमें उम्मीद है कि केंद्र सरकार इसमें देरी नहीं करेगी और तुरंत कदम उठाएगी।”

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