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सिर्फ नीति बनाना काफी नहीं — अपंजीकृत क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स को भी ठहराना होगा जवाबदेह

क्रिप्टो के जरिए कानून की आंखों में धूल झोंक रहे हैं सट्टेबाज़ी प्लेटफॉर्म्स

12th April, 2025 , Delhi:

क्रिप्टो संपत्तियां अब सिर्फ एक तकनीकी उत्सुकता नहीं रहीं, बल्कि वैश्विक वित्तीय और नियामकीय विमर्श का केंद्र बन चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं जैसे फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF), इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी बोर्ड (FSB) ने साफ चेतावनी दी है कि क्रिप्टो एसेट्स का दुरुपयोग अवैध वित्तीय लेन-देन, मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी जैसे गंभीर जोखिम बढ़ा रहा है।

भारत में भी यह चिंता अब वास्तविक रूप ले चुकी है। हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट “The Gambling and Betting Market in India” में खुलासा किया गया है कि अवैध सट्टेबाज़ी और जुए की वेबसाइटें क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए लेन-देन कर रही हैं — जिससे ये वित्तीय नियमों से बचकर बड़ी आसानी से काम कर पा रही हैं। इन प्लेटफॉर्म्स का संचालन अक्सर टैक्स हेवन देशों से होता है, और ये सोशल मीडिया और डिजिटल मार्केटिंग के ज़रिए भारत में भारी संख्या में यूज़र्स को आकर्षित कर रहे हैं।

इन साइटों का तरीका काफी सुनियोजित है — सबसे पहले ये UPI या विदेशी वॉलेट जैसे AstroPay के ज़रिए शुरुआती भुगतान करवाती हैं, और फिर यूज़र को क्रिप्टो में ट्रांजैक्शन का विकल्प दिया जाता है। जिससे पारंपरिक पेमेंट सिस्टम की निगरानी को चकमा देना आसान हो जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के अंत में सिर्फ चार अवैध प्लेटफॉर्म — Parimatch, Stake, 1xBet और Batery Bet — पर तीन महीनों में 1.6 अरब से ज़्यादा विज़िट दर्ज हुए।

ये प्लेटफॉर्म USDT, Ethereum और Bitcoin जैसी क्रिप्टोकरेंसी को खुलेआम स्वीकार कर रहे हैं। जहां एक ओर आम यूज़र्स को क्रिप्टो की स्वतंत्र और सीमा-रहित प्रकृति लुभाती है, वहीं यह स्वतंत्रता इन अवैध साइटों के लिए मनी लॉन्ड्रिंग, टैक्स चोरी और सरकारी नियंत्रण से बचाव का एक शक्तिशाली उपकरण बन गई है।

इनका उद्देश्य सिर्फ भुगतान में आसानी नहीं, बल्कि पैसों के असली स्रोत और गंतव्य को छुपाना है। टैक्स चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और नियामकीय ढांचे को दरकिनार करने के लिए ये एक शक्तिशाली हथियार के रूप में क्रिप्टो का इस्तेमाल कर रहे हैं।

सिर्फ नीति बनाना काफी नहीं — अपंजीकृत क्रिप्टो प्लेटफॉर्म्स को भी ठहराना होगा जवाबदेह

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दुर्भाग्य से, यह समस्या सिर्फ सट्टा वेबसाइटों तक सीमित नहीं है। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की अलर्ट लिस्ट में कई डिजिटल प्लेटफॉर्म शामिल हैं जो अपने आपको ट्रेनिंग या सलाह देने वाले मंच बताकर अपंजीकृत क्रिप्टो ट्रेडिंग की सुविधा दे रहे हैं — वो भी बिना किसी वैध अनुमति या अनुपालन के, सीधे PMLA जैसे नियमों की अवहेलना करते हुए।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि जहां एक ओर ये अवैध प्लेटफॉर्म बिना किसी नियामकीय पालन के खुलेआम फल-फूल रहे हैं, वहीं जो वैध और पंजीकृत संस्थाएं हैं, वे भारी टैक्स और कड़े अनुपालन नियमों के कारण बाज़ार से बाहर होती जा रही हैं। उनके लिए सख्त KYC, जिम्मेदार गेमिंग नीतियां और ट्रांजैक्शन रेगुलेशन का पालन करना जरूरी होता है, जिससे उनका संचालन महंगा और जटिल हो जाता है।

इस असमान प्रतिस्पर्धा में ईमानदार और ज़िम्मेदार ऑपरेटर पीछे रह जाते हैं, जबकि नियम तोड़ने वाले आगे बढ़ते हैं। यह सिर्फ भारतीय डिजिटल इकोनॉमी के लिए खतरा नहीं है, बल्कि आम नागरिकों और देश के संसाधनों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बन चुका है।

अब वक्त आ गया है कि सरकार इन अवैध वेबसाइटों को ‘छोटे खिलाड़ी’ मानकर नज़रअंदाज़ न करे। ये प्लेटफॉर्म करोड़ों यूज़र्स और अरबों की लेन-देन के साथ एक संगठित और सुनियोजित चुनौती बन चुके हैं। क्रिप्टो का इस्तेमाल इनके लिए कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है जिससे ये प्लेटफॉर्म्स अपने अवैध मुनाफे को छुपा कर कानून की पकड़ से बच रहे हैं।

अगर अब भी इनपर सख्ती नहीं की गई, तो भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का संतुलन बड़े स्तर पर प्रभावित हो सकता है।

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