नई दिल्ली, 02 जनवरी 2026
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने आज *इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस)* के तहत 22 नए प्रस्तावों को मंजूरी दी, जिससे *41,863 करोड़ रुपये* का अनुमानित निवेश और *2,58,152 करोड़ रुपये* की उत्पादन क्षमता का रास्ता साफ हुआ। इन मंजूरियों से *33,791 प्रत्यक्ष रोजगार* सृजन की उम्मीद है। राजधानी में आयोजित एक समारोह में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों को मंजूरी पत्र सौंपे।
इस कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद और MeitY के सचिव श्री एस. कृष्णन भी उपस्थित थे।
यह स्कीम की तीसरी किश्त है, जिसमें इससे पहले 24 आवेदनों को 12,704 करोड़ रुपये के निवेश के साथ मंजूरी दी गई थी।
मंजूर परियोजनाएं मोबाइल फोन, दूरसंचार, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोटिव, आईटी हार्डवेयर तथा रणनीतिक इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों के लिए आवश्यक *11 महत्वपूर्ण टारगेट सेगमेंट* के विनिर्माण को कवर करती हैं। इनमें शामिल हैं:
– बेयर कंपोनेंट्स: पीसीबी, कैपेसिटर, कनेक्टर, एनक्लोजर और ली-आयन सेल
– सब-एसेम्बली: कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले मॉड्यूल और ऑप्टिकल ट्रांससीवर
– सप्लाई चेन आइटम: एल्यूमिनियम एक्सट्रूजन, एनोड मटेरियल और लैमिनेट
ये परियोजनाएं आठ राज्यों — आंध्र प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और राजस्थान — में फैली हुई हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में संतुलित क्षेत्रीय विकास के लिए सरकार के प्रयासों को रेखांकित करती हैं।

ये मंजूरियां घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करेंगी, महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स के आयात पर निर्भरता कम करेंगी तथा भारत में उच्च-मूल्य विनिर्माण क्षमताओं का निर्माण करेंगी।
समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री वैष्णव ने उद्योगपतियों से समर्पित *डिजाइन टीमों* की स्थापना को प्राथमिकता देने का आग्रह किया तथा इस प्रक्रिया में सरकार की सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने विश्वविद्यालयों से जुड़ी कॉमन डिजाइन सुविधाओं के माध्यम से सहयोग के अवसरों पर प्रकाश डाला तथा बताया कि भारत में लगभग *300 विश्वविद्यालयों* में पहले से ही ऐसे कार्यक्रम चल रहे हैं जहां छात्र पूर्ण इलेक्ट्रॉनिक चिप डिजाइन सीख रहे हैं।
मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय बाजार मानकों को पूरा करने के लिए *सिक्स सिग्मा* गुणवत्ता मानकों की ओर संक्रमण पर भी जोर दिया तथा इसमें भी सरकार की सहायता का वादा किया।
इसके अलावा, उन्होंने उद्योग संघों से घरेलू संपर्कों को मजबूत करने और पारिस्थितिकी तंत्र में अधिक सहयोग बढ़ाने के लिए *बड़े खरीदार-विक्रेता सम्मेलन* आयोजित करने का आह्वान किया — एक उत्तर में और एक दक्षिण में।
ये कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने के दृष्टिकोण से पूरी तरह संरेखित हैं तथा 2030-31 तक 500 अरब डॉलर के उत्पादन लक्ष्य की दिशा में तेजी ला रहे हैं।




