डिजिटल वित्त की दिशा बदलते स्टेबलकॉइन और वैश्विक प्रणाली

वैश्विक भुगतान प्रणाली में तेज़ी, पारदर्शिता और कम लागत के नए साधन के रूप में उभरते स्टेबलकॉइन

नई दिल्ली: 2026 के प्रारंभ तक यह पूरी तरह साफ़ हो गया है कि स्टेबलकॉइन के बिना वित्तीय भविष्य की चर्चा संभव नहीं है। पिछले एक वर्ष में बड़ा बदलाव तब देखने को मिला जब प्रमुख वित्तीय संस्थानों ने इन्हें स्वीकार किया। आज स्टेबलकॉइन उन संस्थानों के नियंत्रण में हैं, जो वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को दिशा देते हैं।

शुरुआत में स्टेबलकॉइन का बाज़ार विदेशी जारीकर्ताओं, अस्पष्ट नियमों और बिखरे हुए नियंत्रण से जुड़ा हुआ था। अब स्थिति बदल चुकी है। आज इस क्षेत्र में तेज़ी वैश्विक कार्ड नेटवर्क, बड़े बैंक और नियमों के तहत काम करने वाली फिनटेक कंपनियाँ ला रही हैं। ये संस्थान स्टेबलकॉइन को मुद्रा का विकल्प नहीं मानते, बल्कि धन को ज़्यादा तेज़ और आसान तरीके से भेजने का साधन मानते हैं। इसलिए चर्चा अब इस पर नहीं है कि स्टेबलकॉइन होने चाहिए या नहीं, बल्कि इस पर है कि उनका इस्तेमाल कैसे किया जाए।

जानी मानी कंपनी वीज़ा, स्टेबलकॉइन के विस्तार में अहम भूमिका निभा रही है। यूएसडीसी के साथ उसके शुरुआती प्रयोग छोटे स्तर पर हुए थे, लेकिन 2025 में वीज़ा ने इन्हें अपनी मुख्य रणनीति में शामिल कर लिया। कंपनी अब ब्लॉकचेन तकनीक के ज़रिये अपने अलग-अलग देशों के भुगतान केंद्रों के बीच पैसा भेज रही है। वीज़ा का तर्क सरल है—अगर एक डॉलर स्टेबलकॉइन के रूप में तुरंत भेजा जा सकता है, तो पारंपरिक बैंकिंग की धीमी और महंगी व्यवस्था पर क्यों निर्भर रहा जाए?

आज वीज़ा, सर्कल और अन्य नियमों के तहत काम करने वाली स्टेबलकॉइन कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। आम लोगों को इसमें कोई बड़ा बदलाव महसूस नहीं होता, लेकिन कंपनियों और कोष प्रबंधकों के लिए पैसा भेजना अब तेज़ और सस्ता हो गया है।

मास्टरकार्ड ने इस मामले में अलग रास्ता अपनाया है। उसने किसी एक स्टेबलकॉइन पर भरोसा करने के बजाय ऐसा ढाँचा तैयार किया है, जिसमें बैंक और डिजिटल वॉलेट अपनी पसंद के स्टेबलकॉइन जोड़ सकते हैं। मास्टरकार्ड की प्रणाली में ग्राहक की पहचान की जाँच, जोखिम वाले खातों को रोकना और प्रतिबंधों की निगरानी पहले से शामिल है। इससे उन संस्थानों को सुविधा मिली है, जो बिना किसी अव्यवस्था के स्टेबलकॉइन का उपयोग करना चाहते हैं।

वॉल स्ट्रीट पर जेपी मॉर्गन की जेपीएम कॉइन सबसे बड़ी निजी पहल बनी हुई है। यह आम लोगों के लिए नहीं है और केवल बड़े कारोबारी ग्राहकों तक सीमित है। इसके ज़रिये रोज़ाना बहुत बड़ी मात्रा में पैसा इधर-उधर किया जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि डॉलर अब सीधे डिजिटल नेटवर्क पर इस्तेमाल होने लगा है। जब दुनिया का सबसे बड़ा बैंक अपनी भुगतान प्रणाली बदलता है, तो दूसरे बैंक भी उसी दिशा में बढ़ते हैं।

अगर जेपी मॉर्गन बड़े संस्थानों का प्रतिनिधित्व करता है, तो PayPal आम उपभोक्ताओं के स्तर पर बदलाव दिखाता है। 2023 में जब PayPal ने पीवाईयूएसडी शुरू किया, तो कई लोगों ने इसे देर से उठाया गया और कमज़ोर क़दम माना। लेकिन 2026 तक यह सोच बदल चुकी है। पीवाईयूएसडी ने PayPal को तेज़ घरेलू भुगतान सेवाओं और कम लागत वाली फिनटेक कंपनियों से मुकाबला करने में मदद की है।

नियामकों के लिए भी पीवाईयूएसडी एक अहम उदाहरण बना। जब कोई जानी-पहचानी कंपनी ऐसी डिजिटल मुद्रा जारी करती है, जो बिना बैंक भुगतान व्यवस्था के दुनिया भर में चलती है, तो पारंपरिक बैंक और डिजिटल कंपनियों के बीच की सीमा तेज़ी से धुंधली होने लगती है।

दुनिया के कई देशों में अब नियामक संस्थाएँ केवल नियम बनाने तक सीमित नहीं हैं। वे अब निगरानी और सख़्त अमल पर ध्यान दे रही हैं। सिंगापुर, जापान, संयुक्त अरब अमीरात और यूनाइटेड किंगडम इसके उदाहरण हैं। सरकारें मान रही हैं कि अगर निजी कंपनियाँ मुद्रा जारी कर रही हैं, तो उस पर स्पष्ट और मज़बूत नियम होना ज़रूरी है।

इन सभी बदलावों से यह साफ़ है कि स्टेबलकॉइन अब केवल क्रिप्टो जगत तक सीमित नहीं रहे हैं। वे वैश्विक स्तर पर धन भेजने की व्यवस्था का अहम हिस्सा बन चुके हैं। वित्तीय ढाँचा एक साथ बदल भी रहा है और आधुनिक भी हो रहा है। स्टेबलकॉइन अब इस व्यवस्था के केवल हिस्सा नहीं हैं, वे इसे आगे बढ़ाने वाली ताक़त बन चुके हैं।

 

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