राजस्थान दिवस पर लोककला और नृत्यों की मनोहारी झलकियों से सजा प्रगति मैदान

राजस्थानी लोकनृत्यों और बिहू की लय पर झूम उठा प्रगति मैदान का एम्फीथिएटर

नई दिल्ली: प्रगति मैदान में राजस्थान दिवस की सांस्कृतिक शाम ने व्यापार मेले की रौनक को चार चांद लगा दिए। राजस्थानी कलाकारों और असम के बिहू नृत्य ने दर्शकों को लोक-संगीत की अनोखी यात्रा कराई।

कार्यक्रम की शुरुआत एम्फीथिएटर हॉल में मुख्य अतिथि, राजस्थान की अतिरिक्त आवासीय आयुक्त, श्रीमती अंजु ओम प्रकाश द्वारा दीप प्रज्वलन से हुई। राजस्थान पर्यटन स्वागत केंद्र की उप निदेशक, श्रीमती दीपाली शर्मा ने मुख्य अतिथि सहित सभी आमंत्रितों का अभिनंदन किया। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में राजस्थान और असम—दोनों राज्यों के कलाकारों ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मंच पर जीवंत किया।

संध्या की शुरुआत बाड़मेर के भंगुर खां की खडताल वादन और पारंपरिक राजस्थानी गीतों से की गई, जिसने वातावरण को लोक-संगीत से भर दिया। इसके बाद जयपुर की मोरू सपेरा और उनकी टीम ने चरी, घूमर और कालबेलिया जैसे प्रसिद्ध राजस्थानी नृत्यों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। नृत्यांगनाओं की अद्भुत देह-लचक, कलात्मक मुद्राएँ और पलकों व मुंह से अंगूठी उठाने जैसी अनूठी कलाओं ने सभागार में लगातार तालियों की गूंज बनाए रखी।

पर्यटन अधिकारी श्री मनोज शर्मा ने बताया कि जयपुर के श्री महावीर नाथ के समूह ने भवई नृत्य की परंपरागत और रोमांचक प्रस्तुति दी। इसके उपरांत असम के ब्रह्मपुत्रा नॉर्थ ईस्ट ग्रुप—जिदरंग ने बिहू नृत्य पेश किया, जिसकी ऊर्जा और लय पर दर्शक देर तक झूमते रहे।

कार्यक्रम के समापन पर भरतपुर-डीग के श्री विष्णु शर्मा और उनके दल ने मोहक मयूर नृत्य से शाम को चरम पर पहुँचा दिया। उनकी ‘फूलों की होली’ प्रस्तुति ने पूरा वातावरण ब्रज की रंगीन छटा से भर दिया। कार्यक्रम का संचालन अलवर के श्री खेमेन्द्र सिंह ने अपनी सुंदर और प्रभावी वाणी से किया।

 

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