मिज़ोरम पहली बार रेल नक्शे पर, आइज़ोल जुड़ा राष्ट्रीय नेटवर्क से

पीएम मोदी करेंगे बैराबी–सैरांग रेल लाइन का उद्घाटन, दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी के लिए नई ट्रेनें शुरू

12 सितंबर 2025, नई दिल्ली

कई दशकों तक उत्तर–पूर्व को एक दूरस्थ इलाक़ा माना जाता था, जहाँ विकास की राह देखी जाती रही।हमारे भाई–बहन उम्मीदों के साथ जीते थे, लेकिन उन्हें वह बुनियादी ढांचा और अवसर नहीं मिल पाए जिसके वे हक़दार थे।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में यह तस्वीर बदली है। जो इलाका कभी दूर का फ्रंटियर  कहा जाता था, वह आज भारत की तरक़्क़ी का फ्रंट–रनर  बनकर उभरा है।

मिज़ोरम पहली बार रेल नक्शे पर, आइज़ोल जुड़ा राष्ट्रीय नेटवर्क से

शांति, समृद्धि और प्रगति

यह बदलाव रेलवे, सड़कें, हवाई अड्डे और डिजिटल कनेक्टिविटी में रिकॉर्ड निवेश की वजह से संभव हुआ है।

शांति समझौते स्थिरता ला रहे हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ अब सीधे लोगों तक पहुँच रहा है। आज़ादी के बाद पहली बार उत्तर-पूर्वी क्षेत्र को भारत की विकास यात्रा का केंद्र माना जा रहा है।

रेलवे में किए गए निवेश को ही देख लीजिए। 2009 से 2014 की तुलना में क्षेत्र के लिए रेलवे बजट पाँच गुना बढ़ा है। सिर्फ इस वित्तीय वर्ष में ही 10,440 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

2014 से 2025 तक कुल बजट आवंटन 62,477 करोड़ रुपये रहा है। आज यहाँ 77,000 करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाएं चल रही हैं। इससे पहले उत्तर-पूर्व ने इतना बड़ा निवेश कभी नहीं देखा था।

मिज़ोरम पहली बार रेल नक्शे पर, आइज़ोल जुड़ा राष्ट्रीय नेटवर्क से

मिज़ोरम की पहली रेल लाइन

मिज़ोरम भी इसी बदलाव का हिस्सा है। यह राज्य अपनी समृद्ध संस्कृति, खेल प्रेम और खूबसूरत पहाड़ियों के लिए जाना जाता है। फिर भी, दशकों तक यह संपर्क की मुख्यधारा से दूर रहा।

सड़क और हवाई संपर्क सीमित था। रेलवे राजधानी तक नहीं पहुंच पाई थी। लोगों के सपने थे, लेकिन विकास की राहें अधूरी थीं। अब ऐसा नहीं है।

अब हालात बदल चुके हैं। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के हाथों कल बैराबी–सैरांग रेलवे लाइन का उद्घाटन मिजोरम के लिए ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा। 51 किलोमीटर लंबी यह परियोजना 8,000 करोड़ से अधिक की लागत से बनी है और पहली बार आइजोल को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ेगी।

इसके साथ ही, प्रधानमंत्री सैरांग से दिल्ली (राजधानी एक्सप्रेस), कोलकाता (मिज़ोरम एक्सप्रेस) और गुवाहाटी (आइजोल इंटरसिटी) के लिए तीन नई ट्रेन सेवाओं को भी हरी झंडी दिखाएंगे।

यह रेलवे लाइन कठिन पहाड़ी इलाकों से होकर गुजरती है। रेल इंजीनियरों ने मिजोरम को जोड़ने के लिए 143 पुल और 45 सुरंगें बनाई हैं। इनमें से एक पुल कुतुब मीनार से भी ऊंचा है।

दरअसल, इस इलाके में, जैसे अन्य हिमालयी रेल परियोजनाओं में होता है, रेलवे लाइन लगभग पूरी तरह पुल और सुरंगों के क्रम से बनी है — एक पुल, फिर एक सुरंग, फिर दोबारा पुल, और इसी तरह आगे।

हिमालय सुरंग निर्माण विधि

उत्तर–पूर्व हिमालय युवा और नाज़ुक पहाड़ हैं। यहाँ ज़मीन कठोर चट्टानों की जगह मुलायम मिट्टी और जैविक सामग्री से बनी है। ऐसी स्थिति में सुरंग और पुल बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण था। पारंपरिक तरीके यहां काम नहीं कर सकते थे, क्योंकि ढीली मिट्टी निर्माण का भार सहन नहीं कर पाती।

इस समस्या को दूर करने के लिए हमारे इंजीनियरों ने एक नया और अनोखा तरीका विकसित किया, जिसे अब हिमालयन टनलिंग मेथड कहा जाता है। इस तकनीक में पहले मिट्टी को स्थिर और मज़बूत किया जाता है, फिर सुरंग और निर्माण का काम किया जाता है। इससे क्षेत्र की सबसे कठिन परियोजनाओं में से एक को पूरा करना संभव हुआ।

एक और बड़ी चुनौती ऊँचाई पर पुलों को टिकाऊ बनाना था, क्योंकि यह क्षेत्र भूकंप प्रभावित है। इसके लिए भी विशेष डिज़ाइन और उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल किया गया, जिससे पुल सुरक्षित और मज़बूत बन सके।

यह स्वदेशी नवाचार दुनिया भर में ऐसे ही भौगोलिक इलाकों के लिए एक मॉडल है। हज़ारों इंजीनियरों, मज़दूरों और स्थानीय लोगों ने मिलकर इसे संभव बनाया।

भारत जब निर्माण करता है, तो दूरदृष्टि और समझदारी के साथ करता है।

क्षेत्र को लाभ

रेलवे को विकास का इंजन माना जाता है। यह नए बाज़ारों को करीब लाता है और व्यापार के अवसर पैदा करता है। नई रेल लाइन मिज़ोरम के लोगों का जीवन स्तर सुधारेगी।

राजधानी एक्सप्रेस की शुरुआत के साथ ही आइजोल और दिल्ली के बीच सफर का समय 8 घंटे कम हो जाएगा। नई एक्सप्रेस ट्रेनें आइजोल, कोलकाता और गुवाहाटी के बीच की यात्रा को भी तेज और आसान बनाएंगी।

किसान, खासकर जो बांस की खेती और बागवानी से जुड़े हैं, वे अपनी उपज को तेजी से और कम लागत पर बड़े बाजारों तक पहुंचा पाएंगे। अनाज और खाद जैसे जरूरी सामान की ढुलाई भी आसान होगी।

पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि मिज़ोरम की प्राकृतिक सुंदरता तक पहुंचना और सुविधाजनक हो जाएगा। इससे स्थानीय कारोबार और युवाओं के लिए नए अवसर बनेंगे। यह परियोजना लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार तक बेहतर पहुंच भी देगी।

मिज़ोरम के लिए यह कनेक्टिविटी सिर्फ सुविधाएँ ही नहीं, उससे कहीं अधिक लेकर आएगी।

पूरे देश में विकास

देशभर में रेलवे में रिकॉर्ड स्तर पर बदलाव हो रहा है। हाल ही में 100 से अधिक अमृत भारत स्टेशन का उद्घाटन किया गया। साथ ही 1200 और स्टेशन तैयार हो रहे हैं। ये स्टेशन यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं देंगे और शहरों को नए विकास केंद्र बनाएंगे।

150 से ज़्यादा चल रहीं हाई-स्पीड वंदे भारत ट्रेनें यात्री सुविधा के नए मानक स्थापित कर रही हैं। साथ ही, लगभग पूरे नेटवर्क का विद्युतीकरण रेलवे को और हरित बना रहा है।

2014 से अब तक 35,000 किलोमीटर नई पटरियां बिछाई जा चुकी हैं। यह उपलब्धि पिछले छह दशकों के कुल काम से भी अधिक है। सिर्फ़ पिछले साल ही 3,200 किलोमीटर नई रेल लाइनें जोड़ी गईं। विकास की यह गति और बदलाव उत्तर-पूर्व में भी साफ दिखाई दे रहा है।

पूर्वोत्तर का विकास विज़न

प्रधानमंत्री ने कहा है कि हमारे लिए पूर्व (EAST) का मतलब है – एम्पॉवर (सशक्त बनाना), एक्ट (कार्य करना), स्ट्रेंथन (मजबूत बनाना) एंड ट्रांसफॉर्म (बदलना)। ये शब्द पूर्वोत्तर के प्रति उनके दृष्टिकोण का सार प्रस्तुत करते हैं।

कई क्षेत्रों में निर्णायक कदमों ने इस क्षेत्र में बड़ा बदलाव सुनिश्चित किया है। असम में टाटा का सेमीकंडक्टर प्लांट, अरुणाचल प्रदेश में टाटो जैसी जलविद्युत परियोजनाएं और बोगीबील रेल-सह-सड़क पुल जैसी ऐतिहासिक संरचनाएं इस क्षेत्र का रूप बदल रही हैं।

इसके साथ ही, गुवाहाटी में एम्स की स्थापना और 10 नए ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों ने स्वास्थ्य सुविधाओं और संपर्क को मज़बूत किया है।

फ्रंटियर से फ्रंट–रनर

कई दशकों तक मिज़ोरम के लोगों ने सड़कों, स्कूलों और रेलवे के लिए इंतज़ार किया है। अब वह इंतज़ार ख़त्म हुआ है। ये परियोजनाएं हमारे प्रधानमंत्री की पूर्वोत्तर के प्रति विज़न का प्रमाण हैं: एक ऐसा क्षेत्र जिसे कभी फ्रंटियर (सीमान्त) माना गया परन्तु अब फ्रंट-रनर (अग्रणी) के रूप में उभरा है।

(लेखक, भारत सरकार में रेल, आईटी और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के कैबिनेट मंत्री हैं।

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