भारतीय लोकतंत्र के लिए जरूरी है स्वच्छ राजनीति: भारतीय मतदाता संगठन

नागरिक सजगता से ही भारतीय लोकतन्त्र में गुणवत्ता विकास सम्भव

नई दिल्ली: देश में चुनाव सुधारों की आवश्यकता पर जोर देते हुए भारतीय मतदाता संगठन ने दोहराया कि राजनीतिक शुचिता और पारदर्शिता के बिना लोकतंत्र में गुणवत्ता युक्त विकास संभव नहीं है।

भारत में माननीय प्रधानमंत्री जी नरेंद्र मोदी जब से आए हैं, चुनाव सुधार और लोकतंत्र सुधार के लिए समर्पित हैं। परिवारवाद न हो, एक देश-एक चुनाव हो, चुनाव में महिलाओं को 33% या 50% स्थान मिले। पार्टी, राजनीतिक पार्टियों की बढ़ती हुई संख्या बेमतलब है और अन्य कई आपराधिक कारणों से व्यक्तिगत आमदनी करने और व्यक्तिगत प्रभाव बढ़ाने के लिए पार्टियां बनाई जा रही है, बेमतलबी पार्टियों का रजिस्ट्रेशन चुनाव आयोग खत्म करें।

अन्य अनेक सुझाव, अनेक आयोगों ने और सरकार द्वारा नियुक्त आयोगों ने, बताए हैं। लेकिन सबसे पहले आवश्यक है कि हमारे विधि निर्माता, कानून बनाने वाले, लॉ मेकर्स, किसी भी हालत में अपराधी न हो। अपराधी व्यक्ति को जब हम घर में, व्यापार में, दुकान में, संस्था में, सरकार में, सेना में, कहीं भी भर्ती नहीं करते हैं। रखते नहीं हैं, और अगर सरकार ने ऐसा कभी कहीं देखा, तो उसको नौकरी से निकाला जाता है, दंडित किया जाता है।

तो फिर अपराधी इस देश में कैसे 5-7 बार, 100-100 केस, हत्या के, रेपके, किडनैपिंग के होने के बावजूद, माननीय मंत्री, विधानसभा के सदस्य, लोकसभा के सदस्य, और अनेक तरह के आयोगों में भी शामिल हो जाते हैं। यह बड़ी विडंबना है।

लोकतंत्र में सुधार और जनता की सेवा तभी होगी जब किसी भी अपराधी को कोई चुनाव में लड़ने का और हमारा, भारत के मतदाताओं की तो मांग है कि उन्हें चुनाव में वोट देने का भी अधिकार नहीं हो, जैसे कि सिंगापुर में है। भारतीय मतदाता संगठन, भारत के मतदाता, और अनेक माननीय इस देश मेंचिंतक, धर्मगुरु, सभी खुश होंगे, अगर 9-10 दिसंबर को लोकसभा में होने वाली चर्चा में, चुनाव सुधार के संबंध की चर्चा में, हम, भारत के सभी माननीय लोकसभा सदस्यों से निवेदन करते हैं कि निरपराधीकरण, राजनीति के निरपराधीकरण के विषय में अवश्य चर्चा करें और कानून पारित करने का प्रयास करें, जल्दी से जल्दी।

यह माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 5-6 साल पहले अपना मत बताया था। हमें, भारत के मतदाताओं को पूर्ण आशा है कि अगर मोदी है तो ये मुमकिन है। ये चुनाव सुधार और लोकतंत्र सुधार की बातें कानून में सिर्फ लोकसभा और राज्यसभा ही कर सकती है। राज्य की विधानसभाएं इन विषयों पर कोई भी निर्णय नहीं ले सकती हैं।

भारत के नागरिकों को इन चुनाव सुधारों के विषय में, लोकतंत्र के सुधार के विषय में, जल्दी सरकार अधिक से अधिक आवश्यक सुधार लाने का प्रयास करे, ऐसी हम सबकी, भारत के सभी नागरिकों की मांग है।

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