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नई बुलंदियों की ओर बढ़ता भारत: पांबन ब्रिज देश की प्रगति, आस्था और तकनीकी श्रेष्ठता का प्रतीक

के. अन्नामलाई (अध्यक्ष, भाजपा तमिलनाडु एवं सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी) का विचार

जब नेतृत्व दृढ़ निश्चयी और दूरदर्शी हो, तो राष्ट्र केवल आगे नहीं बढ़ता — वह इतिहास रचता है। तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई ने नए पांबन पुल को भारत की विकास यात्रा में एक गौरवशाली उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक पुल नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी दक्षता, सांस्कृतिक चेतना और मजबूत नेतृत्व का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में इंफ्रास्ट्रक्चर को नई पहचान

अन्नामलाई ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते दस वर्षों में देश ने आधारभूत संरचनाओं के क्षेत्र में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। वंदे भारत, अमृत भारत और नमो भारत जैसी योजनाओं ने भारतीय रेल को विश्वस्तरीय पहचान दिलाई है। जम्मू-कश्मीर में चिनाब और अंजी पुलों की तरह अब दक्षिण भारत में नया पांबन ब्रिज भी राष्ट्रीय गौरव का कारण बना है।

यह पुल रामेश्वरम को देश की मुख्य भूमि से जोड़ता है और समुद्री लहरों के बीच इसके निर्माण को अन्नामलाई ने “तकनीकी चमत्कार” बताया। उन्होंने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस पुल का शिलान्यास 2019 में किया था, और अब 2024 में वे स्वयं इसका उद्घाटन कर रहे हैं—यह सरकार की प्रतिबद्धता और समयबद्ध कार्य संस्कृति का प्रमाण है।

तकनीकी विशेषताएं और निर्माण की जटिलता

2.08 किलोमीटर लंबे इस पुल में 99 स्पैन हैं, जिनकी लंबाई 18.3 मीटर है, और एक वर्टिकल लिफ्ट स्पैन 72.5 मीटर का है जो बड़े जहाजों के आवागमन को भी आसान बनाएगा। इसके सब-स्ट्रक्चर में 333 पाइल्स हैं। पुल को एंटी-कोरोजन तकनीक, पॉलीसिलाक्सासिन पेंट, एडवांस स्टेनलेस स्टील और फाइबर रिइनफोर्स प्लास्टिक से तैयार किया गया है, जिससे इसकी मजबूती और टिकाऊपन सुनिश्चित होती है।

रामेश्वरम: आस्था और विरासत का संगम

अन्नामलाई ने याद दिलाया कि रामेश्वरम केवल एक शहर नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था का केंद्र है। रामायण काल में भगवान श्रीराम ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी और समुद्र पर पुल बनाने से पहले यहीं भगवान शिव की पूजा की थी। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन को आते हैं।

नए पांबन ब्रिज के बन जाने से रामेश्वरम अब एक बार फिर देश के सभी हिस्सों से सीधे जुड़ गया है, जिससे तीर्थयात्रियों को यात्रा में बड़ी सुविधा होगी। इससे स्थानीय पर्यटन, व्यापार और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

इंजीनियरिंग और आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक

के. अन्नामलाई ने कहा कि इस पुल ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत अब केवल पुल बना नहीं सकता, बल्कि विश्वस्तरीय तकनीकी उत्कृष्टता से उन्हें डिज़ाइन और प्रमाणित भी कर सकता है। आईआईटी मद्रास और आईआईटी बॉम्बे जैसे संस्थानों ने इस कार्य को सफलतापूर्वक पूरा कर दुनिया को भारतीय तकनीकी क्षमता का परिचय कराया है।

अंत में अन्नामलाई ने कहा कि नया पांबन ब्रिज केवल एक आधारभूत संरचना नहीं, बल्कि भारत की विकास यात्रा, धार्मिक आस्था और तकनीकी आत्मनिर्भरता का संगम है। यह पुल बताता है कि जब नेतृत्व स्पष्ट, संकल्पित और दूरदर्शी हो, तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं होता।

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