रामगंज, मधेपुरा में बिहार की पहली वैज्ञानिक मधु उत्पादन एवं जैव विविधता परियोजना का शुभारंभ

CSIR–NBRI और रामालय फाउंडेशन की संयुक्त पहल के तहत वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन व जैव विविधता पुनर्स्थापन से किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण पारिस्थितिकी को सशक्त करने का लक्ष्य।

मधेपुरा, बिहार, 18 नवंबर 2025


बिहार ने ग्रामीण पारिस्थितिकी संरक्षण और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए मधेपुरा जिले के रामगंज गांव में राज्य की पहली वैज्ञानिक मधु उत्पादन एवं जैव विविधता पुनर्स्थापन परियोजना की शुरुआत की है। यह अभिनव पहल CSIR फ्लोरिकल्चर मिशन–फेज़ II के तहत चल रही है, जिसका नेतृत्व मिशन निदेशक डॉ. अजीत कुमार शसानी कर रहे हैं। परियोजना को CSIR–नेशनल बॉटैनिकल रिसर्च इंस्टिट्यूट (NBRI), लखनऊ द्वारा संचालित किया जा रहा है और इसे रामालय फाउंडेशन (स्थापना–श्री प्रशांत कुमार) के सहयोग से आगे बढ़ाया जा रहा है।

शुभारंभ समारोह में जिला प्रशासन, ब्लॉक विकास विभाग, वन विभाग के प्रतिनिधि तथा कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) के विशेषज्ञ मौजूद थे। परियोजना को तकनीकी दिशा देने में जीविका, कुमारखण्ड के ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर श्री मनोज कुमार और मधुमक्खी वाला इंडस्ट्री, लखनऊ के संस्थापक श्री निमित सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

कार्यक्रम में पहुंचे जिला उपायुक्त श्री तरणजोत सिंह, IAS, ने इस पहल को ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर हर संभव समर्थन देने का आश्वासन देते हुए परियोजना स्थल का दौरा कर वैज्ञानिकों और किसानों से सीधे संवाद करने की इच्छा भी जताई।

रामगंज, मधेपुरा में बिहार की पहली वैज्ञानिक मधु उत्पादन एवं जैव विविधता परियोजना का शुभारंभ

रेमालय फाउंडेशन के संस्थापक श्री प्रशांत कुमार ने कहा कि परियोजना का उद्देश्य एक आत्मनिर्भर मॉडल तैयार करना है, जो किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय जैव विविधता का संरक्षण भी सुनिश्चित करे। उन्होंने CSIR–NBRI की वैज्ञानिक टीम के मार्गदर्शन को परियोजना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

CSIR–NBRI की टीम में प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. सुशील कुमार, डॉ. बिकरमा सिंह और प्रोजेक्ट एसोसिएट प्रभात मौर्य शामिल हैं, जो प्रशिक्षण व कार्यान्वयन की निगरानी करेंगे। डॉ. सुशील कुमार के अनुसार, रामगंज क्षेत्र में वैज्ञानिक मधु उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण के माध्यम से और मजबूत किया जाएगा। वहीं, डॉ. बिकरमा सिंह ने बताया कि वैज्ञानिक मधुमक्खी पालन न केवल मधु उत्पादन बढ़ाता है बल्कि संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाकर पर्यावरण संतुलन को भी मजबूत करता है।

परियोजना के अंतर्गत लगभग 2 किमी क्षेत्र में जैव विविधता को पुनर्जीवित करने, 200 वैज्ञानिक मधुमक्खी बक्से स्थापित करने और किसानों की आय में 30–50% तक वृद्धि की योजना है। आने वाले तीन वर्षों में 200 से अधिक नए किसान इस योजना से जुड़ेंगे, विभिन्न ब्लॉकों में इसका विस्तार होगा और 20–30 हेक्टेयर में पौधारोपण का लक्ष्य पूरा किया जाएगा।

यह पहल न केवल मधेपुरा बल्कि पूरे बिहार के लिए सतत आजीविका और पर्यावरण संरक्षण का एक सफल मॉडल बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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